बाबा जय गुरुदेव जी की महापुरुष की खोज की तपस्या पूरी हुए और बाबा जी को महँ हस्ती मिल गई, अलीगढ़ जिले के छोटे से गाँव चिरोली के एक साधरण ब्रह्मण परिबार के पडित घूरेलाल जी शर्मा के रूप में। सदा सरल जीवन था गुरु जी परमार्थ के दानी थे। बाब जी अपनी मजिल देखि तो bani अवरुध्य हो गई आँखे छलकने लगी। ये वही महा पुरुष थे जिन्होंने निराशा के अंधकार में आशा की किरण जगाई थी। अब कहे सुनने में क्या था बाब जी चरणों में झुक गये ‘ गुरु भी दुर्लभ, चेला दुर्लभ, बड़े भाग से मेल मिलापा” गुरु जी भाव बिभोर थे ऐसे शिष्य देख कर बो तो धन्य हो रहे थे। गुरु जी ने कहा की अब तो तुझे बुला लिया ना क्यों की जब बाबा जी ने कश्मीर की पहाड़ी की चोटी मौत को गले लगाने के लिए बाबाजी के क़दम बढ़ने बाले थे की वही महापुरुष प्रगट हुए और कहा तह की चिंता मत कर तुझे बुला लगा। बो वही महा पुरुष थेर जिनके सामने बाबा जी खड़े थे।






